BRICS Parliamentary Forum 2026: भारत में 21 देशों की संसदों का जुटान

आतंकवाद से लेकर AI तक पर होगी चर्चा
नई दिल्ली।BRICS Parliamentary Forum 2026: 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की शुरुआत हो रही है। भारत की मेजबानी में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में 21 देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। सम्मेलन संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन में आयोजित किया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह सुबह 10 बजे शुरू होने का कार्यक्रम है। लोकसभा अध्यक्ष और मंच के अध्यक्ष ओम बिरला उद्घाटन भाषण देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मेलन में शामिल होंगे और ब्रिक्स सदस्य तथा साझेदार देशों से आए संसद अध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे।
इस वर्ष के सम्मेलन की केंद्रीय थीम ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना’ है। इसके तहत लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने, नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप विकास को बढ़ावा देने और विधायी संस्थाओं की कार्यक्षमता बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।
मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित होंगे सत्र
BRICS Parliamentary Forum 2026 में चार प्रमुख विषयों पर उच्चस्तरीय सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य संसदों की संस्थागत क्षमता बढ़ाने से लेकर वैश्विक शासन व्यवस्था में सहयोग और सतत विकास को प्रोत्साहित करने तक के मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना है।
सम्मेलन के चार प्रमुख विषय इस प्रकार हैं:
- मजबूती (Resilience): संस्थाओं को मजबूत बनाने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में संसदों की भूमिका।
- नवाचार (Innovation): कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती डिजिटल तकनीकों के मानवीय एवं जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देना।
- सहयोग (Cooperation): संसदीय भागीदारी के जरिए वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाना।
- स्थिरता (Sustainability): समावेशी और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में संसदों की भूमिका।
इन सत्रों में संस्थागत क्षमता निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर विधायी निगरानी, डिजिटल बदलाव और सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। साथ ही, तेजी से बदलती तकनीकी और वैश्विक परिस्थितियों के बीच संसदों की भूमिका को प्रभावी बनाने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा।
संसदीय समितियों की बैठक में कूटनीति और बेहतर प्रक्रियाओं पर चर्चा
मुख्य सत्रों के अलावा ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों की संसदों की अंतरराष्ट्रीय मामलों से संबंधित समितियों के अध्यक्षों की विशेष बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें संसदीय कूटनीति को मजबूत करने, संस्थागत क्षमता विकसित करने और विधायी कार्यों से जुड़ी बेहतर प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान पर चर्चा होगी।
सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधिमंडलों को द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संवाद के अवसर भी मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, 64 देशों के साथ गठित संसदीय मैत्री समूहों की बैठकों के जरिए अंतरराष्ट्रीय संसदीय सहयोग को विस्तार देने पर जोर रहेगा।
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भारत के लिए यह सम्मेलन ग्लोबल साउथ के देशों की साझा प्राथमिकताओं को सामने रखने, बहुपक्षीय चुनौतियों पर संवाद बढ़ाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने का अवसर है।
सम्मेलन का समापन 27 अक्टूबर 2026 को होगा। इस दौरान संयुक्त वक्तव्य को औपचारिक रूप से अपनाया जाएगा। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समापन भाषण देंगे और ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता औपचारिक रूप से चीन को सौंप दी जाएगी।
भारत-रूस संसदीय वार्ता में आतंकवाद और वैश्विक सहयोग पर जोर
ब्रिक्स संसदीय मंच की शुरुआत से एक दिन पहले, 25 अक्टूबर को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक की। रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रूसी संघ की संघीय सभा के स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने किया।
लोकसभा सचिवालय के अनुसार, बैठक में भारतीय और रूसी संसदीय प्रतिनिधिमंडलों ने वैश्विक मंचों पर आपसी सहयोग बढ़ाने और आतंकवाद से मुकाबले के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने संसदीय संपर्कों को मजबूत बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया।
ओम बिरला ने भारत-रूस की दीर्घकालिक मित्रता का किया उल्लेख
ओम बिरला ने भारत की संसद और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से व्याचेस्लाव वोलोडिन तथा उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उन्होंने भारत और रूस के बीच आपसी विश्वास, सम्मान और साझा आकांक्षाओं पर आधारित विशेष एवं समय की कसौटी पर खरी उतरी मित्रता को रेखांकित किया।
बिरला ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में रूस के निरंतर समर्थन की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के विरुद्ध एकजुटता और दृढ़ संकल्प दिखाना चाहिए तथा वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत और रूस वर्ष 2027 में राजनयिक संबंधों की स्थापना के 80 वर्ष पूरे करेंगे। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में दोनों देशों की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हुई है।
युवा और महिला सांसदों के बीच संपर्क बढ़ाने का प्रस्ताव
बैठक में संसदीय कूटनीति के महत्व पर चर्चा करते हुए ओम बिरला ने लोकसभा और रूसी स्टेट ड्यूमा के बीच नियमित संस्थागत संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता बताई। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, उन्होंने भारत-रूस अंतर-संसदीय आयोग की नियमित बैठकें आयोजित करने और दोनों देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान का सुझाव दिया।
इस प्रक्रिया में युवा और महिला सांसदों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया, ताकि दोनों देशों के जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद और सहयोग को व्यापक बनाया जा सके।
भारत की वर्ष 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए बिरला ने जन-केंद्रित दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण बताया और ब्रिक्स संसदों के बीच सहयोग बढ़ाने में रूस की सक्रिय भागीदारी की अपील की।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई। साथ ही, बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
बिरला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत दोहराई और परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को रूस से मिल रहे निरंतर समर्थन की सराहना की।
परमाणु ऊर्जा, उद्योग और व्यापार में सहयोग की संभावनाएं
भारत-रूस बैठक में परमाणु ऊर्जा, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। ओम बिरला ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के नागरिकों के बीच गहरा स्नेह और सद्भावना भविष्य में सहयोग को और विस्तार देने की मजबूत नींव है।
रूसी स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने व्यापार, उद्योग और कृषि के क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने संयुक्त कारोबारी उपक्रमों को प्रोत्साहित करने और द्विपक्षीय व्यापार तथा निवेश के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने की जरूरत बताई।
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वोलोडिन ने ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों के साथ-साथ भारत की संसद और रूसी स्टेट ड्यूमा के बीच नियमित संवाद को भी महत्वपूर्ण बताया। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, उन्होंने सांस्कृतिक और मानवीय क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने तथा दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की रूस की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने भारत-रूस संबंधों के भविष्य पर भरोसा जताते हुए कहा कि संसदों के बीच लगातार संवाद और विभिन्न क्षेत्रों में करीबी सहयोग से दोनों देशों की पुरानी साझेदारी और मजबूत होगी।
क्यूबा, मिस्र और बेलारूस के प्रतिनिधिमंडलों से भी मिले ओम बिरला
रूस के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद ओम बिरला ने क्यूबा, मिस्र और बेलारूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की। इन बैठकों में विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और उपयोगी चर्चा हुई।
इन संपर्कों के जरिए भारत ने ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ-साथ साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों के साथ संवाद को भी आगे बढ़ाया है। दो दिवसीय BRICS Parliamentary Forum 2026 का समापन 27 अक्टूबर को होगा, जब संयुक्त वक्तव्य अपनाने के बाद मंच की अध्यक्षता चीन को सौंपी जाएगी।
